कई दिनों बाद ककुआ कल शाम को दिखाई दिए।मैं पान की दुकान के पास खड़ा था कि अचानक उन पर नज़र पड़ी।वह बचकर निकलने ही वाले थे कि मैंने उन्हें आवाज दी।ककुआ ने मुड़कर देखा तो उन्हें आने का इशारा किया।राम-राम करने के बाद मैंने पूछ लिया , ‘ का बात है ककुआ ? बहुत ढीले दिखाई दे रहे हो? अब तो लड़ाई ख़त्म हो गई है।सोना-चाँदी भी गिरने लगा है।फिर काहे की परेशानी है ?’
मेरे इतना कहते ही ककुआ का सपाट चेहरा पीड़ा से भर गया, ‘भाड़ में जाए लड़ाई और सोना-चाँदी।हमरी आस्था के साथ जो खेलवाड़ किया गया है,ऊ बहुतै कस्ट दे रहा है।तुमहू तो सुने होगे
,मंदिर मा जौन लूट हुई है।का बताई बबुआ,मन बहुत व्यथित है।जब से ई ख़बर सुने हैं, केहू काम मा मन नाहीं लागत है।पूजा-पाठ तक से मन उचिट गवा है।पता नहीं ऊ डाकुअन का नींद क़इसे आवत् होई ?’ कहते-कहते उनकी आँखें भर आईं।
ककुआ की मनोदशा देख कर मुझे बड़ा दुःख हुआ।मैंने उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की, ‘हाँ, गड़बड़ तो बहुत हुई है ककुआ, मगर जाँच भी बिठा दी गई है।सच जल्दी सामने आएगा।कितना भी बड़ा अपराधी हो, बचेगा नहीं।सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।’ ककुआ अब बिफर उठे , ‘ई जाँच-आँच से कुच्छो ना होने वाला।बड़का लोगन पर आँच नहीं आने वाली।दूध-ऊध छोड़िए, ई सब पानी फेरने आए हैं।आख़िर इतने दिन से इत्ता बड़ा कारनामा रोज़ हो रहा था और किसी को ख़बर ही नहीं लगी ? इस पाप में एक-दो चोर शामिल नहीं है बबुआ ! नीचे से ऊपर तक सब मिले हुए हैं।सबसे बड़ा धक्का तो इस बात से लगा है कि यह घिनौना काम किसी बाहर वाले ने नहीं किया है।सोमनाथ मंदिर को लूटै वाला बिदेसी म्लेच्छ था,लेकिन यहिका तो उन्हीं ने लूट लिया जिन पर रखवाली का जिम्मा था।बाड़ ही जब खेत खा जाए, फिर बचता का है ? हमको तो लगता है कि हमरे करेजा में जइसे किसी ने कटार घोंप दिया हो।ई घाव जल्द भरै वाला नय है बाबू ! ई जो बड़का जाँच बिठाई गई है,इससे पूरी जाँच ही बैठ जानी है।चोर-डकैत भला ख़ुद की जाँच करें हैं कभी ?’
‘नहीं ककुआ, तनिक तो भरोसा रखो सरकार पर।कुछ लोगों पर शक की सुई घूम रही है।उम्मीद है वह सुई जल्द रुकेगी और सारे चोर पकड़े जाएँगे।आप उल्टा-सुल्टा काहे सोच रहे हैं।
अब तो रपट भी दर्ज हो गई है।’ मैंने तसल्ली देने की कोशिश की।ककुआ अभी भी संतुष्ट नहीं दिख रहे थे।लंबी साँस लेते हुए बोले, ‘हमने दुनिया देखी है बबुआ ! इतना बड़ा चोरी हो रहा था और रामलला के पटवारी और चौकीदार सब आँख बंद किए थे।हमें तो केवल राघवेंद्र सरकार पर भरोसा है।ऐसे दुष्टों के लिए उन्होंने स्वयं कहा है, ‘जौ नहिं दंड करौं खल तोरा,भ्रस्ट होइ स्रुतिमारग मोरा।’ अब वही इन राक्षस लोगन का नास करेंगे।’ कहते हुए ककुआ आसमान की ओर ताकने लगे।
बड़ी देर से हमारी बातचीत सुन रहा पानवाला बीच में कूद पड़ा, ‘बाबू जी, ग़लत तो हुआ है।हम तो यह भी सुने हैं कि कागभुसुंडी जी भी उड़ा दिए गए हैं।गरुड़जी को उन्होंने ही रामकथा सुनाई थी।कहीं यह लूटकथा भी न किसी को सुना दें,इसलिए उनको भी ठिकाने लगा दिया गया है।ऐसा न्यूज़वाला कह रहा था।बाक़ी राम जाने।’ ऐसा कहते हुए उसने पान का बीड़ा ककुआ की ओर बढ़ा दिया।
पान को मुँह में दबाते हुए ककुआ दहाड़े , ‘सोना,चाँदी,रुपया और ज़मीन सब चाँप के बइठे हैं, मुदा कुच्छो हजम नहीं होगा।करोड़ों लोगन का सराप लगेगा।कीड़े पड़ेंगे इन्हें।’ तभी बनवारी चाचा साइकिल से आते हुए दिखाई दिए।ककुआ को ‘राम-राम’ कहते हुए वह तनिक मुस्कुराए और आगे बढ़ गए।पान की पीक को पिच्च से थूकते हुए ककुआ बोले , ‘ बिधर्मी को हँसने का मौक़ा हमने ही दिया है।जब अपने ही माल मा खोट है तो दुसरका मज़ा लेंगे ही।अपनों के घात से उबरना आसान नहीं है।बाक़ी जो ई सब किए हैं,उनके लिए तुलसी बाबा पहले ही कह गए हैं, ‘अपने करम जाँहिं अपकारी’।हम इसी बात से संतोस किए हैं।’
पानवाले की दुकान में अब तक काफ़ी लोग जमा हो चुके थे।सबको ग़म और गुस्सा एक साथ था।तभी एक नेताजी आए और शुरू हो गए , ‘ कुछ लोग सनातन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।भगवान हमारे हैं,मंदिर भी हमारा है।विरोधियों को केवल गोली और बोली चलाना आता है।सारे अपराधी पकड़े जा चुके हैं।आप लोग किसी बहकावे में न आएँ।भगवान तो हमारी रक्षा करते हैं,हम उनकी रक्षा करेंगे,ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं?’
यह सुनते ही वहाँ सन्नाटा छा गया और ककुआ हमसे बिना राम-राम किए आगे बढ़ गए।