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सोमवार, 19 अक्तूबर 2015

एक दिन का निदान !

आप किसी भी समस्या से परेशान हैं तो खुश हो जाएँ ।जल्द ही इसका समाधान निकलने वाला है।सरकार के हाथ ऐसी जुगत लग गई है जिससे समस्या कितनी भी बड़ी हो,उसका नैनो-हल उसके पास आ गया है।शहरों में ‘टेरेफिक’ होते हुए ट्रैफिक को ‘कार-फ्री डे’ मनाकर इसकी शुरुआत कर भी दी गई है।अब हमें तीन सौ पैंसठ दिन यातायात के बारे में नहीं सोचना है।साल में या महीने में एक दिन किसी एक सड़क को आम जनता के लिए खोला जायेगा।उस पर लोग अपनी साइकिल दौड़ा सकते हैं,गन्ने चूसते  हुए टहल सकते हैं और मनपसंद फ़िल्मी-गाने गुनगुना सकते हैं।उसी सड़क पर बने डिजाइनर गड्ढों में बच्चे एडवेंचर कर सकते हैं,कागज की नाव बहा सकते हैं और गप्पियों में कंचे खेल सकते हैं ।

अब धीरे-धीरे हर काम टोकन के जरिये किया जा रहा है।पहले पैसा पाने के लिए हुंडी तोडना पड़ता था या अँगूठे की छाप देना पड़ता था।अब मशीन में टोकन अंदर और पैसा बाहर।यानी बड़े तामझाम को एक टोकन में समेट लेना।इसी तरह दूध और पानी भी मिलने लगा है।ऐसा रहा तो ताज़ी हवा भी हमें टोकन के जरिये मिलेगी।इसके लिए बस एक ‘डे’ ही टोकन है।एक ही दिन में हम अपने फेफड़ों में इतनी हवा भर लेंगे कि पूरे साल भर तक रीचार्ज होते रहेंगे।

कामों को जल्दी करने और आसानी से करने की इस अनूठी योजना से प्रभावित होकर ‘संविधान-दिवस’ की तैयारी की जा रही है।हर समय संविधान को अपने हाथ में लेकर चलने वाले अब सावधान हो जाएँ।‘कानून-फ्री डे’ रोज मनाने वालों के लिए पाबंदी आयद की जा रही है।उन्हें अपनी जुबान और म्यान को काबू में रखना होगा।केवल एक दिन की ही तो बात है।इससे कानून से हताश और निराश लोगों को सरकार बड़ी राहट देगी।ऐसे ही मांसाहार से परेशान लोग ‘मांसाहार-फ्री डे’ की माँग करके मामला रफा-दफ़ा कर सकते हैं ।जानवरों को भी इससे संदेश जायेगा कि इंसान अभी भी जानवर नहीं बन पाया है।

यह ‘एक-दिनी’ आइडिया है गजब का।इससे उत्साहित होकर ‘लोकपाल-लोकपाल’ चिल्लाने वाले अब ‘भ्रष्टाचार-फ्री डे’ की माँग कर सकते हैं ।इस योजना से अफसरों और बाबुओं को भी ऐतराज नहीं होगा। इस एवज में उन्हें ‘ड्यूटी-फ्री’ नाम से भत्ता दिया जा सकता हैसरकार का भ्रष्टाचार पर वार करने का वादा ऐसे ही पूरा होगा।भ्रष्टाचार पर इतनी सब्सिडी तो हर कोई छोड़ देगा।हाँ,इसके बाद विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं पड़नी चाहिए,यह ज़रूर सुनिश्चित करना होगा ।

पहले एक दिन किसी संकल्प के लिए अलॉट होता था,अब किसी न किसी काम के लिए होगा।यह बदलाव बहुत बड़ा है।जमीनी-स्तर पर काम तो अभी शुरू हुआ हैवह दिन जल्द आएगा जब हर दिन किसी काम के लिए अलॉट होगा और केवल टोकन के रूप में किया जायेगा।रोजाना आ रहे एक से बढ़कर एक बयानों पर पाबंदी तभी लग सकती है जब इसके लिए एक दिन निश्चित कर दिया जाये।’बयान-फ्री डे’ होने से जनता का कुछ नुकसान तो होगा पर बयानबाजों को दुगुनी शक्ति के साथ रीचार्ज होने के लिए टोकन भी तो मिल जायेगा।उन्हें अब टोकने की नहीं टोकन की ज़रूरत है।

इससे पहले कि सारे दिन खत्म हो जाएँ,‘दुराचार-फ्री डे’,’लूटमार-फ्री डे’,’कदाचार-फ्री डे’ पर भी सबकी सहमति बन जानी चाहिए।

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