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बुधवार, 25 दिसंबर 2013

दो हज़ार तेरह का कमाल !

जनसन्देश में 25/12/2013 को

 
इस साल ने जाते जाते आम आदमी को निहाल कर दिया है।मंहगाई से खाली उसकी झोली तेजपाल,लोकपाल और केजरीवाल से भर दी है।अब आम आदमी को न इस साल से और न सरकार से कोई मलाल बचा है।कानून-व्यवस्था पर भरोसा रखने के लिए आम आदमी के जाल में पहले संत का चोला धारे महंत पर किरपा आनी शुरू हुई।उसके बाद आम आदमी को,बिना दसबंद दिए ही,किरपा मिलने लगी।इससे उसकी खुशियों का प्याला लगातार छलकने लगा।अब यह तो बाद में ही पता चलेगा कि उसके साथ हमेशा की तरह इसमें भी कोई छल तो नही हुआ।

मीडिया के तेजतर्रार नायक इसी साल अपना सारा तेज खो बैठे।उन पर समय की मार पड़ी या अच्छी उम्मीदों की हार हुई ,पर आम आदमी को इससे बड़ा सबक मिला।इस साल ने उसे अपने आदर्शों पर पुनर्विचार करने का पाठ पढ़ाया है।संत हो,महंत हो या कोई और,इस साल ने सबके ऊपर टॉर्च मारी और उनके अँधेरे भी नज़र आये ।मगर इस अँधेरे में भी रोशनी की एक बड़ी मशाल आम आदमी के हाथ में लगी है।अब वह कुछ समय के लिए अपने मन में इस बात का भरम रख सकता है कि आने वाला काल उसका है।

भ्रष्टाचार कोई इस साल की उपज नहीं है।उसकी फसल सालोंसाल से लहलहा रही है और आम आदमी से कभी कटी नहीं।अब इसी को काटने के लिए लोकपाल आ रहा है।आम आदमी को इसी साल ने यह हथियार पकड़ाया है।भ्रष्टाचार की फसल कटने की ख़ुशी अभी से मन रही है और हथियार लाने का श्रेय हर कोई लेना चाह रहा है,पर असल श्रेय तो इस साल को ही जाता है।उसने अपना काम कर दिया है ,आगे लोकपाल और नया साल जाने।

जाते-जाते इस साल ने आम आदमी को केजरीवाल के रूप में बड़ा गिफ्ट दिया है।ठीक क्रिसमस के मौके पर यह साल सेंटाक्लॉज़ बनकर आया है।ख़ास आदमी को किसी गिफ्ट की दरकार नहीं होती क्योंकि अबतक सरकार उसी की होती रही है ।ख़ास आदमी जहाँ अपने झोले-बोरे खाली रखने का आदी नहीं होता वहीँ मंहगाई व भ्रष्टाचार आम आदमी का झोला भरने नहीं देते,पर इस साल ने आम आदमी को भारी-भरकम उपहार दे दिया है।इसने सेंटाक्लॉज़ बनकर उसे पूरी सरकार ही दे दी है।अब आम आदमी को दो हजार तेरह से कोई कोई मलाल नहीं है।उसे भ्रष्टाचार की तेरहवीं करने को लोकपाल और उस पर लगाम लगाने को केजरीवाल मिल गए हैं।ख़ास आदमी चाहे तो अपने बाल नोच सकता है।

 

1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

परिवर्तन का वर्ष रहा है २०१३।