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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

सरकार की रिकॉर्ड विकास-दर !


जो लोग वर्तमान सरकार के परफोर्मेंस से निराश हैं और उसकी लानत-मलामत कर रहे हैं,उन्हें मुँह की खानी पड़ी है।सरकार के मुखिया पर असरदार न होने के गंभीर आरोप बराबर लगाये जाते रहे हैं पर मौन रहना उनकी कमी नहीं बल्कि यूएसपी रही है।इस बीच उनके योग्य मीडिया सलाहकार ने खुलासा करके साबित किया है कि जो भी बातें मीडिया में चल रही हैं,भ्रामक और बेसिर-पैर की हैं।उन्होंने यह कहकर सबकी बोलती बंद कर दी कि मानव-जाति के इतिहास में सबसे अधिक विकास यदि हुआ है,इसी काल में हुआ है।इस कथन के बाद हँसी के कई ठहाके कहीं दूर जाकर अपने लिए पनाह माँगने लगे।इस तरह प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने आलोचकों का मुँहतोड़ जवाब दिया है ।
सरकार के उक्त कथन का कागजी दस्तावेज भी इस समय निर्गत हुआ है,जिससे जानकारी मिली है कि आर्थिक विकास की रफ़्तार वास्तव में मानव-जाति में इससे पहले कभी नहीं हुई।इस बात को साबित करने के लिए छोटा-सा उदाहरण सामने है।एक छोटा किसान ,पाँच साल पहले महज एक लाख रूपये अपनी गाढ़ी कमाई से निकालता है और सरकार-समर्थक नीतियों से उसको तीन सौ पचीस करोड़ के पार ले जाता है।इसी से सरकार के विकास गति का अंदाज़ा लग जाता है ।
ऐसा तभी होता है जब स्वयं सरकार की आर्थिक गति तीव्र हो।उन लोगों का विरोध बिला वजह है जो देश की आर्थिक गति को अपनी नपनी से माप रहे हैं।सरकार देश को चलाती है इसलिए उसकी गति और उसका विकास ही देश का विकास होता है ।यह छोटी-सी बात आर्थिक विशेषज्ञों की समझ में नहीं आ रही है।इस उदाहरण से एक बात और साफ़ हो गई कि देश में भ्रष्टाचार की केवल हवा है।लाख को अरब में बदलने का हुनर भ्रष्टाचार की उपस्थिति में नहीं हो सकता।एक आम आदमी केवल केले की फ़सल उगाकर ‘बनाना कंट्री’ में ही इस तरह की उपलब्धि हासिल कर सकता है।वर्तमान सरकार के मूल्यांकन के लिए क्या इतना ग्रोथ कम है ?
कुछ लोग अभी भी सरकार की उपलब्धियों को मानने को तैयार नहीं हैं।उनकी मुख्य शिकायत है कि प्रधानमंत्री कुछ बोलते नहीं।इस बारे में सरकार ने दोनों हाथों से दस का दम दिखाया है।उसके कदम से कदम मिलाने के लिए तेज दिमाग और दूरदृष्टि ज़रूरी है।इसलिए कामकाज ही नहीं व्यक्तिगत संबंध बनाते समय भी व्यक्ति को पूरी तरह सज्ज होना चाहिए।सरकार से उसका करीबी रिश्ता हो,यदि सीधा जुड़ा हो तो सोने पे सुहागा।दूरदृष्टि होने से पास की ही नहीं दूर-दूर तक की ज़मीन पर उसकी पकड़ बनी रहती है।ऐसे में कोई ज़मीन यदि उसके हाथों में हो तो वह सीधा सोना पैदा करती है।कौडियों की जमीन को करोड़ों में बदलने का पेटेंट इस सरकार के पास है। इस पेटेंट को हासिल करने की अर्हता यदि किसी में नहीं है तो यह सरकार की नहीं उसकी नाकामी है।
हमें सरकार और उसके सलाहकारों पर पूरा भरोसा है।मानव-जाति के इतिहास में उसके बहुमूल्य योगदान के लिए सभी को कतारबद्ध होकर कृतज्ञ होना चाहिए।सरकार ने तो अपना दम दिखा दिया है अब हमें भी हर हाथ आई तरक्की को लपक कर कृतज्ञता का बटन दबा देना चाहिए।  

जनसन्देश में 24/04/2014 ,25/04/2014 को हरिभूमि में

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