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देशहित में मंत्री जी का त्याग
मंत्री जी सड़क पर सरपट दौड़े जा रहे थे।तीन - चार अधिकारी छाता लिए उनके पीछे - पीछे भाग रहे थे।सूरज सिर पर चमक रहा था प...
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राजधानी फिर से धुंध की गिरफ़्त में है।बीसियों दिन हो गए , साफ़ हवा रूठी हुई है।शायद उसे भी किसी के ख़त का इंतज़ार है।फ...
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मित्रता एक ऐसा रिश्ता है , जो सबसे ज़्यादा अबूझ रहा है।यह देशकाल , परिस्थिति और सुविधा के अनुसार परिवर्तित होता रहता है।मि...
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1 टिप्पणी:
धार्मिक व्यक्ति के दृष्टिकोण में, नेता के दृष्टिकोण में ,भीड़ के दृष्टिकोण में और लेखक के दृष्टिकोण में फर्क दिखना ही चाहिए। आपने लेखकीय धर्म का खूब निर्वहन कया है। जोरदार आलेख के लिए बहुत बधाई।
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