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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

वालमार्ट दद्दा और एफडीआई भौजी !


 
07/12/2012 को नई दुनिया में....

आज जब नुक्कड़ की तरफ़ से निकले तो भारी मजमा देखकर कौतूहलवश हम भी रुक गये । हमने भीड़ के अंदर घुसकर कुछ देखने की कोशिश की तो एक लंबी-सी कार के बोनट पर हैट लगाए अत्यंत आधुनिक किस्म के वस्त्र धारण किये एक सभ्य-सा व्यक्ति नज़र आया। पास में आलू और लौकी के टोकरे लिए कई ग्रामीण किसान उसे घेरे खड़े थे। हमने तहकीकात की तो पता चला कि ये वालमार्ट दद्दा हैं। अब हमारी उत्सुकता चरम पर थी। हमने इनके बारे में मीडिया के माध्यम से खूब सुन रखा था,अचानक पास पाकर हम रोमांचित हो उठे। हमने उन तक पहुँचने के लिए अतिरिक्त प्रयत्न किया और एकदम उनके सामने जा पहुँचे।

हमने बिना पूछे ही अपना परिचय दिया और लहालोट होते हुए कहा ‘दद्दा,हम आपको यहाँ पाकर बेहद खुश हैं। आप जैसी अंतर्राष्ट्रीय हस्ती को पाकर यह निरा ग्रामीण क्षेत्र धन्य-धन्य है। हमने तो अभी तक यही सुना था कि आपको यहाँ आने की मंजूरी मिल गई है,पर आप इतनी जल्दी। । । ’हमारी बात को बीच में ही काटते हुए वे अपने हैट को सीधा करते हुए बोले,’अभी हम आए नहीं हैं। यह हमारा औचक निरीक्षण है। हम केवल यह देखने आए हैं कि कौन-सी लोकेशन हमारे आने के लिए दुरुस्त रहेगी ?’ ‘तो फ़िर आपने क्या गाँवों में ही ठहरने की सोच रखी है? अगर ऐसा है तो यहाँ के किसानों और नौजवानों को वाकई में फायदा होगा। ’हमने अपने-आप आगे की बात जोड़ दी। वे ठठाकर हँसे और कहने लगे,भई ! हम तो शहर की तरफ़ जा रहे थे पर पता नहीं कैसे इन गांववालों को खबर लग गई और ये अपनी आलू और लौकी लेकर आ गए। हम यूँ ही थोड़ी इनका माल ले लेंगे। हमारे विशेषज्ञ ही इनकी खरीद-दर निर्धारित करेंगे। इसके लिए इन्हें शहर तक अपना माल पहुँचाना होगा क्योंकि हमारे रुकने और टिकने का इंतजाम केवल बड़े शहर में ही होगा। धीरे-धीरे इन्हें सब समझ आ जायेगा। ये किसान भी ना अपनी सरकार की तरह ही बड़े भोले और नादान हैं !’

तब तक अंदर से एकदम अल्ट्रा-मॉडर्न महिला निकली और उसने दद्दा को निर्देश दिया कि वे वहाँ से तुरत प्रस्थान कर लें,क्योंकि शहर में कई सभ्य लोग उनके अभिनन्दन-समारोह में उनके पधारने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। हमने उनका परिचय जाना तो पता लगा कि वे वालमार्ट दद्दा की पत्नी एफ़डी आई जी हैं। अब हमने दंडवत होकर पुकारा,’भौजी,हमरा प्रणाम स्वीकार करो और दद्दा को यहीं रुकने के लिए कहो। ’ उन्होंने हमारा जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा और वे झट-से गाड़ी के अंदर समा गईं। अब दद्दा ने ही हमारी बात का उत्तर देना उचित समझा और बोले,’देखिए,सबसे पहली बात कि एफडीआई जी आप लोगों की भौजी नहीं हैं। इनका जो भी रिश्ता है, केवल आपके सांसदों,माननीयों और बड़े उद्योगपतियों से है और ये अपना मुँह उन्हीं के सामने खोलती हैं। अब आप हमें जाने दें क्योंकि शहर में बड़े-बड़े उद्योगपति हमारी आरती के लिए उतावले हो रहे हैं और सरकार जी ने लाल-जाजम का इंतजाम किया हुआ है। ’

हम आगे कुछ बोल पाते कि उनकी मोटर पों-पों करके बजने लगी थी। हार्न के शोर से सभी किसान अपने -अपने आलू और लौकी के टोकरे संभाले सड़क के किनारे लग गए। हमने सुना, ठीक उसी समय दूर कहीं एक पुराने गाने की धुन बज रही थी,’परदेसियों से न अँखियाँ लड़ाना,परदेसियों को है एक दिन जाना….

 

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