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गुरुवार, 16 जनवरी 2014

माल से बढ़िया मार्केटिंग हो !




नईदुनिया में 16/01/2014 को प्रकाशित


वो बहुत पुरानी दुकान के मालिक हैं।एक लम्बे अरसे से उनकी दुकानदारी बढ़िया चल रही थी,पर मौसम ने कब करवट बदल ली,उन्हें पता ही न चला।दुकान तो अभी भी है,माल भी खूब ठसा हुआ है पर अचानक खरीदार ही गायब हो गए हैं।अपनी दुकान में हो रहे तगड़े घाटे का उनको तब पता चला ,जब सामने सड़क पर एक गुमटी में नई दुकान खुल गई।उसने कम समय में ही बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले।इस बात से चिंतित होकर उन्होंने अपने कारिंदों को बुलाया और  तुरत-फुरत एक बैठक कर डाली।उसी बैठक में उनको कुछ मौलिक तथ्य पता चले,जिनकी वजह से उनकी दुकान को ऐसे दुर्दिन देखने पड़े ।

चिंतन-बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात यह उभरी कि दुकान का कोई दोष नहीं है।उसमें भरा हुआ माल भी बिकने के अनुकूल है।बस कमी यह रही कि दुकान की होर्डिंग के ऊपर कई जगह कालिख गिर गई है,जिससे ग्राहकों को उसमें लिखी इबारत पढ़ने में मुश्किल आ रही है।यही वजह है कि नए ग्राहक भी दुकान की ऐतिहासिकता से वंचित हो रहे हैं।ऐसे में सबसे ज़रूरी यही है कि दुकान की बाहरी दीवारों का ठीक तरीके से रंग-रोगन किया जाय तथा होर्डिंग व दुकान की नामपट्टिका को आकर्षक रंगों से चमका दिया जाय।कई पुराने कारिंदे इस बात पर अभी भी एकमत हैं कि दुकान के अंदर का माल उच्च गुणवत्ता का है,बस यह बात ग्राहकों को समझाने भर की देर है।यानी,जो कमी है,वह मार्केटिंग की है,दुकान या उसके मालिक की नहीं।मार्केटिंग अच्छी होगी तो दिन के उजाले में भी अँधेरे वाला माल खप जायेगा.इसके लिए बेचने वालों को और ट्रेंड किया जाये ताकि वे ग्राहकों की आँखों में कुशलता से कोयला झोंक सकें।

दुकान के मालिक को अपने  कारिंदों पर उतना ही भरोसा है,जितना कारिंदों को अपने मालिक पर।उन्हें माल के बारे में रत्ती भर भी शंका नहीं है।मुश्किल तो यह है कि जिस दुकान से ग्राहकों को वे कई बार चूना लगा चुके हैं, अब उसी दुकान में चूना लगाने की ज़रूरत आ पड़ी है ।इसलिए ज़रूरी है कि दुकान पर लगे जाले साफ़ किये जाँय नहीं तो उसमें ताले लगने की नौबत आ सकती है।उनके लिए चिंता की बात यह भी है कि नई दुकान वाले अपनी साफ-सफाई पर खूब ध्यान दे रहे हैं,दिन में दो-दो बार झाड़ू बुहार रहे हैं।ऐसे में ग्राहकों को अपनी ओर लाने के लिए खुद पर चटख रंग चुपड़ना ज़रूरी हो गया है।

एक अनुभवी कारिंदे ने सलाह दी है कि मालिक की सभी पुरानी ड्रेस बदली की जाँय।इसके लिए यदि अंतरराष्ट्रीय टेंडर की ज़रूरत हो तो वह भी डाला जाय।तब तक मालिक सूट और टाई को कुछ दिन खूँटी पर टाँगकर टोपी और मफलर लपेट सकते हैं। यह इस मौसम से निपटने का बेहतरीन उपाय हो सकता है।फिर,ऐसा मौसम हमेशा थोड़ी रहेगा ? इस तरह माल और मालिक की मार्केटिंग सही तरह से हो सकती है।ऐसे में सभी कारिंदे अब दुकान और मालिक के नए मेक-अप में जुट गए हैं।

 

3 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मौसम है शायराना - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माल में दम उसकी गुणवत्ता का हो, सजावट का नहीं, अनुभवी ग्राहक सब जानता है।

Bhawna Pandey ने कहा…

khareedane waale soch samjh kar khareedate hain