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मंगलवार, 24 मार्च 2015

तुम मन की बात सुनो !

तुम किसी भ्रम या भुलावे में न रहो।तुम्हारे असली हमदर्द हमीं हैं।हम ‘मन की बात’ करते हैं और वो तुम्हारे तन की।मन हमेशा अच्छा सोचता है।भूखे पेट होने पर तन भले ही अकड़ जाए पर लड्डू मन में ही फूटते हैं।इसलिए मन की सुनो।जो मन से सुखी है,उसको तन और धन की चिंता सताती भी नहीं।हम तो चाहते हैं कि तुम सब कुछ हमें सौंपकर चिंतामुक्त हो जाओ।यही हमारा संदेश है।एक-एक कर सबको समझा रहे हैं,धीरे-धीरे तुम भी समझ जाओगे।दूसरों के बहकावे में न आओ।हमने वर्षों पुरानी उनकी ज़मीन छीन ली है,इसलिए उनको तकलीफ हो रही है।थोड़े दिन बाद तुम्हारी तरह वो भी एडजस्ट कर लेंगे।

विरोधियों को आधार चाहिए,वे इसके लिए जूझ रहे हैं।हम तुम्हें भी ‘आधार’ देंगे पर उनकी लड़ाई में तुम मत जूझो।जल्द ही इससे तुम्हारी पहचान पुख्ता हो जाएगी।ज़मीन का क्या है,आज इसकी कल उसकी।ज़मीन रहेगी तो फ़सल की सुरक्षा हर समय खतरे में रहेगी।सूखा,बाढ़ या ओलावृष्टि होने पर तुम्हें फिर हमारी ही शरण में आना पड़ेगा।तो पहले ही क्यों न समर्पित हो जाओ ? तुम्हें वह सब सुख मिलेगा,जो इस सोंधी मिटटी ने तुम्हें नहीं दिया है।माटी-कचरे में डूबने के तुम्हारे दिन गए।देखो मैंने तुम्हारे लिए ‘मेक इन इंडिया’ से नया खिलौना बनवाया है।तुम इस घोड़े पर सवारी करो,पर लगाम हमारे हाथ में रहेगी।तुम अपनी बैलगाड़ी को हमारी बुलेट ट्रेन से रिप्लेस कर लो।यह रास्ते में बिना थके-ठिठके अपने गंतव्य तक पहुँचेगी।हाँ,बैलों की चारा-सानी के लिए जैसे नांद की ज़रूरत होती है,वैसे ही हमें तुम्हारी ज़मीन का रकबा चाहिए।हम इसमें तुम्हें मुँह मारने से तब तक नहीं रोकेंगे,जब तक तुम ‘मन की बात’ सुनते रहोगे।
हम अपने लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं।हमें तुम्हारे लिए सब करना है पर चूंकि तुम नादान हो,इसलिए तुम्हारा हित वही है,जो हम समझते हैं।तुम हल जोतना,बीज रोपना और खेत सींचने जैसे झंझटों से ऊपर उठ जाओ।सोशल मीडिया पर आओ और देखो,हमने कैसी दीवार खड़ी कर दी है।’विकास’ को अब खेत-खलिहानों में मत निहारो,यहाँ देखो।हमारे लाखों फ़ॉलोवर्स हैं,जो सोशल मीडिया को लगातार सींच रहे हैं।नई फसलें यहीं उगा करेंगी और यहाँ की बातों से ही तुम्हारा पेट भरेगा।इसलिए हल,कुदाल,खुरपी ज़मीन सब कुछ छोड़-छाड़कर हमारे पीछे आ जाओ,फ़ॉलोवर बन जाओ,खुश रहोगे।

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