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बुधवार, 15 जून 2016

सरकार की कार और काग के भाग !

भाग केवल आदमियों के ही नहीं खुलते।पक्षियों में अपशकुन का प्रतीक कौआ भी भाग्यशाली हो सकता है।रसखान ने इसका सबूत देते हुए कहा भी है ‘काग के भाग बड़े सजनी,हरि हाथ से ले गयो माखन-रोटी’।पर तब की बात अलग थी।अब एक कौए के हाथ रोटी के बजाय नई कार लगी है।एक मुख्यमंत्री की नई-नवेली गाड़ी पर उनके बैठने से पहले काला कौआ बैठ गया।बिलकुल लालबत्ती के पास।सरकार को कार में शनिदेव दिखाई दिए।उसका ‘भाग’ उस कौए का ‘भाग’ बन गया।मजबूरन सरकार को अपने ‘भाग’ के लिए दुबारा ऑर्डर देना पड़ा।इस के लिए सरकार बहादुर को केवल मुंडी हिलाने की ज़रूरत थी कि राज्य की हुंडी उनके सामने खुल गई।इस बात का ध्यान ज़रूर रखा गया कि इस बार किसी और कौए को उनके ‘भाग’ में चोंच मारने का मौक़ा न मिले।इससे उनकी गाड़ी और कुर्सी दोनों सलामत हो गई।

इस छोटी बात पर विरोधी कांव-कांव करने लगे।कहा जाने लगा कि मुख्यमंत्री जी अन्धविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं।पर उन्होंने बिलकुल ठीक किया।पहली बात कि गाड़ी में कौआ बैठा था।इसे सबने देखा,इसलिए यह अंध-विश्वास की श्रेणी में नहीं आता।दूसरी यह कि कौए को हमारे यहाँ संदेशवाहक माना गया है।उन्होंने सोचा होगा कि हो न हो,यह कौआ हाई कमान का कोई संदेश लेकर आया हो।उसकी तौहीन करना ठीक नहीं।जिस गाड़ी पर हाई कमान का कौआ बैठ चुका हो,उस पर सेवक कैसे बैठ सकता है !

बरसों से यह मान्यता है कि आंगन की मुंडेर पर बैठा कौआ घर में मेहमान आने की सूचना देता है।यहाँ तो ससुरा सीधा मंत्री जी की छाती सॉरी गाड़ी पर ही चढ़ गया।अब ई तो पक्का असगुन हुआ ना ! मंत्री जी तो अपने लिए गाड़ी पर बैठने जा नहीं रहे थे।वे ठहरे भाग्य-विधाता।जनता का भाग्य सुधारने से पहले खुद का बिगड़ जाए,वह भी कोई भाग्य है भला !उनका तो पूरा जीवन ही जनता के लिए अर्पित है सो मुहूर्त के लिए एक गाड़ी और अर्पित हो गई तो कौन-सा आसमान टूट पड़ा !

एक काले कौए से बड़ा ‘भाग’ राजा और उसके राज्य का होता है।शापित हो चुकी गाड़ी से जनता पर वरदान नहीं बरस सकते।इसलिए एक कौए ने राज्य की जनता को बड़े संकट से उबारा ही,साथ ही गाड़ियों की बिक्री को नया सूत्र दिया।आप चाहें तो उसके ‘भाग’ पर रश्क कर सकते हैं !

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