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गुरुवार, 25 सितंबर 2014

मंगली होने की बधाई !

सर्वत्र मंगल ही मंगल की चर्चा है।लोग पहली बार एक-दूसरे को मंगली होने की बधाई दे रहे हैं।हमारे लिए सबसे बड़ी ख़ुशी की बात है क्योंकि हम स्वयं मंगली हैं,इस वजह से मंगल-मिशन से अपना गहरा जुड़ाव रहा ।हममें मंगल का हुनर अंदर तक व्याप्त है ,यह बात विवाह के समय पंडितजी ने कुंडली देखकर कही थी।हमें याद है,उस दिन हमारे घर में किसी ने खाना नहीं खाया था।कहाँ पूरी दावत का इन्तजाम चल रहा था और कहाँ आख़िरी समय में सारा गुड़-गोबर हो गया था।पंडिज्जी ने आखिरी फैसला सुनाते हुए चेताया था कि यह सम्बन्ध होने पर लड़की के प्राणों पर भारी संकट आ सकता है।इसकी जानकारी मिलते ही लड़की वाले दहेज़ के सामान सहित भाग खड़े हुए थे।आज चौबीस साल बाद अचानक उनका फोन आया...’सॉरी,हमसे मिस्टेक हो गई ! हमें इत्ती देर से पता चला कि ‘मंगली’ होना कितना शुभ होता है !’ जब तक हम उनको बताते कि भाई,असल बात क्या है तब तक फोन कट गया।बहरहाल ,हमारे पड़ोसी शर्मा जी इस मौके पर बड़े खुश थे.उनको पहली बार इतना चिंतामुक्त होते देखकर हमें तनिक चिंता हुई तो वे बोले,'यार क्या बताऊँ....आज मेरी बहुत बड़ी टेंशन खत्म हो गई है.अब जब मंगल हमें मिल गया है तो पाकिस्तान कश्मीर की माँग को छोड़ देगा.' हमने उनकी हाँ में हाँ मिलाना ठीक समझा क्योंकि उस वक्त हम टीवी पर प्रधानमंत्री का संबोधन सुन रहे थे.

प्रधानमंत्री कह रहे थे कि मंगल को उसकी ‘मॉम’ मिल गई है,यह सुनकर हमारी कामवाली बड़ी ख़ुश हुई.उसको अचानक दो साल से बिछड़े अपने बेटे राजू के मिलने की उम्मीद हो आई,जो तब पाँच साल का था.हम फिर भी मौन रहे.हम इसी बात से प्रसन्न थे इधर चीनी चुमार में टेंट ही तानते रह गए और हमने मंगल पर खूँटा गाड़ दिया. वैसे भी लाल-ग्रह को लेकर सबने अपने-अपने सपनों की अग्रिम बुकिंग कर रखी है।कुशल उद्यमियों को विज्ञान के अलावा साहित्य,राजनीति और प्रॉपर्टी के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं अभी से दिखने लगी हैं।वे अभी से दूरबीनें लेकर उन सभी को झाँकने में जुट गए हैं.

जब से दुनिया के देशों को पता चला है कि मंगल तक जाने में ‘राजकोट’ के एक पुर्जे का कमाल रहा है,उस पुर्जे की माँग बढ़ गई है।अमेरिका और रूस सबसे अधिक बेचैन हैं।खबर तो यह भी है कि ओबामा ने मोदी जी से वह ‘राजकोटी-पुरजा’ अपनी अमेरिकी-यात्रा में साथ लाने के लिए भी निवेदन किया है।


जो साहित्यकार धरती के प्रतीकों से ऊब चुके थे,उन्हें अब लाल-ग्रह में अनोखे बिम्बों की तलाश रहेगी ।केवल व्यंग्यकार ही बचे हैं जिन्हें अभी भी लगता है सारा निठल्लापन इसी धरती पर है।उम्मीद है कि देर-सबेर वे भी वहां पहुँच जाएँगे।हम प्रॉपर्टी वाले क्षेत्र से पूरी तरह निश्चिन्त हैं,सबसे पहले वे ही मंगल-ग्रह को गुलज़ार करेंगे।खबर मिली है कि कई महारथियों ने प्लॉट्स की ऑनलाइन बुकिंग शुरू भी कर दी है।सुनते तो यह भी हैं कि कुछ लोग लाल मिट्टी को यह कहते हुए बेच रहे हैं कि यह सीधे मंगल-ग्रह से आई हुई है.

मंगल पर पहुँचने का बड़ा फायदा राजनेताओं को भी होने वाला है।जिन्हें आपस में चुनावी-सीटें बाँटने में दिक्कतें पेश आ रही हैं,उनके सामने एक नया विकल्प आ गया है।इस लिहाज़ से मंगल की खोज ऐतिहासिक है जिससे ऐसे कर्मठ नेताओं का वहीँ पर हमेशा के लिए पुनर्वास किया जा सकता है।कुल मिलाकर मंगल सबके लिए मंगल लाया है।

1 टिप्पणी:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत रोचक व्यंग...