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रविवार, 12 अगस्त 2012

अंतरात्मा की आवाज़ के फायदे !

नेशनल दुनिया में ०४/०७/२०१२ को प्रकाशित


अंतरात्मा की आवाज़ के फायदे !

इधर हालिया दिनों में फिर से अंतरात्मा की आवाजें चर्चा में हैं.यह आवाजें खासकर हमारे नेताओं को बिलकुल उचित समय पर सुनाई देती हैं और वे तुरत इन्हें अपने चाहने वाले प्रजाजनों तक पहुंचा देते हैं.जब भी कोई बड़ा नेता अपने काम को जायज और असरदार ठहराना चाहता है तो तड़ से उसे वर्षों से सोई बेचारी निरीह पड़ी आत्मा की आवाज़ अचानक सुनाई देने लगती है.इसका उसे ज़बरदस्त फायदा भी होता है.बस इसकी टाइमिंग कमाल की होनी चाहिए,इसलिए जो अभ्यस्त और सिद्धि पाए हुये नेता हैं ,वो इससे फायदा उठाते हैं और जो नए खिलाड़ी होते हैं ,वे अपनी यह आवाज़ दूसरों को सुनाकर भी खाली हाथ रह जाते हैं.

कई वर्ष पहले की बात है जब एक किसान नेता ने उसे प्रधानमंत्री बनाये जाने पर अचानक अपने अंतरात्मा की आवाज़ सुन लि थी और कई अपनों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए एक राजा को प्रधानमंत्री बना दिया था.बाद में वही अंतरात्मा जब दूसरी आवाज़ में उसे सुनाई दी तो उसको पदच्युत करने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी.इस तरह यह आवाज़ इतनी ताकतवर होती है कि रंक को राजा और राजा को रंक बना देती है.

सबसे चर्चित आवाज़ पूरे देश ने तब सुनी थी जब इस देश की सबसे बड़ी पार्टी की नेता को चुनावों में बहुमत मिल गया था,वो अपने दल की नेता भी चुनी जा चुकी थीं,सब कुछ ठीक चल रहा था,पर ऐन शपथग्रहण से पहले अंतरात्मा जी ने ऐसी आवाज़ दी कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद को एक इज्ज़तदार पगड़ी पहना दी.यह अंतरात्मा अब तक की सबसे शक्तिशाली अन्तरात्माओं  में थी,जिसने विपक्षी खेमे का खूँटा अगले कई सालों के लिए उखाड़ दिया.इस अंतरात्मा की आवाज़ का एक खास समय था,उसके बाद तो वह आवाज़ ऐसा घोड़ा बेंच कर सोई कि देश के किसी भी मुद्दे में इतना दम ही न रहा कि उसे जगा सके.

ऐसा नहीं है कि विपक्ष के नेता के पास यह हुनर न हो,पर क्या कहें ,किस्मत ही दगा दे गई.उसके एक बड़े नेता की अंतरात्मा ने तब आवाज़ दी जब वे पाकिस्तान गए हुए थे.इसके लिए उन्होंने अपनी सालों की अर्जित की हुई पुण्याई दांव पर लगा दी,पर जिन्ना साहब को सेकुलर बताना भी काम न आया और उनकी प्रधानमंत्री बनने की ललक पर हमेशा के लिए मट्ठा पड़ गया.इस दुर्घटना के पहले इसी दल के उदारवादी प्रधानमंत्री को भी गुजरात के विषय में अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनाई दी थी पर उन्होंने इसे सबको सुनाया ही नहीं और इस तरह उन्होंने वह स्वर्णिम अवसर गँवा दिया,जिसका अब तक कइयों को अफ़सोस है.

अभी हाल में राष्ट्रपति चुनाव के समय भी हमारे पूर्व राष्ट्रपति जी को ऐसा ही इलहाम हुआ और अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर चुनाव लड़ने से ही इंकार कर दिया,जिससे उनसे अधिक परेशानी उन भाई-बहनों को हुई थी जिनकी अंतरात्माएं इस समय कहीं प्रवास पर गई हुई हैं.बहरहाल इन्हीं राष्ट्रपति महोदय ने आठ साल पहले वाली बड़ी नेता की अंतरात्मा की आवाज़ को अपनी लिखी हुई किताब से सबको सुनाकर खलबली मचा दी है.कई लोग तब से लेकर उस आवाज़ का देशी-विदेशी तरह से पोस्टमार्टम कर रहे थे,अपनी राजनीति को प्राणवायु दे रहे थे,पर यह धक्का इतना गहरा लगा है कि उन्हें आगे का भविष्य फिर से धुंधला दिखाई दे रहा है.अब ऐसी आवाज़ को उनके द्वारा सुनाने से उस कमज़ोर पड़ती आवाज़ को और बल मिल गया है.दुर्भाग्य तो इन महाशय का रहा कि अगर यही आवाज़ महीने-दो महीने पहले बाहर आ जाती तो इन्हें भी भरपूर फायदा मिल सकता था.हो सकता है,हमारे अगले राष्ट्रपति वही होते !

पर,बात यही है कि बिना सही टाइमिंग के ऐसी आवाजें अपना असर खो देती हैं.

             

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