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बुधवार, 15 अगस्त 2012

देश के नाम सालाना संबोधन !

१५/०८/२०१२ को 'जनसंदेशटाइम्स' में



प्यारे देशवासियों !
हम आपसे पैंसठवीं बार मिलकर महान आनंद का अनुभव कर रहे हैं.पिछले कई सालों से जारी भारी  दुष्प्रचार के बावजूद हमने अपने देश की अखंडता,एकता और धर्मनिरपेक्षता की पूरी मजबूती के साथ रक्षा की है.जब देश आजाद हुआ था,हमने गाँधीजी के नेतृत्व में एक संकल्प लिया था कि भारत को उसके सुनहरे दिन लौटायेंगे,अपनी सारी योजनाएं आखिरी आदमी तक पहुँचायेंगे और यकीन मानिये हमने इस कार्य में उल्लेखनीय प्रगति की है.अपने देश का सारा सोना हमारे सुरक्षित हाथों में है,जो छुट्टा और बड़ी मात्रा में धनराशि है,उसे सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद गोपनीय स्विस बैंकों में रखवा दिया गया है.आम जनता के पैसे को भी हमने गलत हाथों में जाने से रोकने के लिए बाबुओं,सिपाहियों और अधिकारियों का त्रि-स्तरीय सञ्चालन-तंत्र तैयार कर दिया है,जिनसे बचकर और छनकर कोई भी रकम इधर-उधर नहीं जा सकती है.
ऐसा नहीं है कि हमने केवल आर्थिक-स्तर पर ही ऐसे क्रांतिकारी सुधार किये हों ! देश के किसानों के लिए हमने एक बलिदानी-जत्था तैयार किया है जो समय पड़ने पर आत्माहुति देने से पीछे नहीं हटते हैं.हमारे सैनिक हमेशा सीमाओं पर दनादन गोली खाने को तत्पर रहते हैं.उनके रहते,आपके धन की सुरक्षा करने में हमसे कोई कोताही नहीं हो सकती.हम देश की पुरानी परम्पराओं के भी ज़बरदस्त पोषक हैं और इसके लिए ‘अतिथि देवो भव’ का मान रखते हुए देश के दुश्मनों को बिरयानी खिलाने का पुरजोर इंतजाम किया गया है,भले ही इस पुण्य-कार्य में हमारा आखिरी आदमी भूख से शहीद हो जाय.हम अगली योजना से ऐसे शहीद को ‘भारत-रत्न’ का ख़िताब देने की सोच रहे हैं.इससे गाँधीजी का वह सपना भी पूरा हो सकेगा ,जिसमें उन्होंने ‘इस’ आदमी की खबर लेने की बात की थी.
हमने देश के लोगों को उनके मौलिक अधिकार देने के लिए भी ठोस कदम उठाये हैं.उन्हें किसी भी आन्दोलन में झंडे ले जाने और फहराने की पूरी स्वतंत्रता दी है,पर इसमें एहतियात बरतते हुए इसका डंडा अपने पास रखा है.झंडा कोई भी और कहीं भी फहरा ले पर डंडा हमारा ही रहेगा.हम देश की चाबी को असुरक्षित हाथों में नहीं जाने देंगे,यह हम आपको विश्वास दिलाते हैं.अगर झंडे के साथ डंडा भी दूसरे के हाथ में चला गया तो देश में अराजक स्थिति फ़ैल जायेगी.डंडे के इतने ज़्यादा वारिस पैदा करने की फ़िलहाल कोई योजना नहीं है.गाँधीजी ने आज़ादी के वक्त जिसके हाथ में डंडा पकड़ाया था,वह वहीँ रहेगा और वहीँ से उठेगा.
हम जनता के बहुत आभारी हैं,जिसने हमें बराबर सम्मान और विश्वास दिया है.इसके बने रहने के लिए भी हमने युद्ध-स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है.लोगों को जाति और धर्म की टॉनिक का नियमित रूप से सेवन करवाया जा रहा है.इनके सेवन से भूख-प्यास और काम की माँग को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलती है.इसके प्रभाव से लोग मजे-मजे में मर लेते हैं और हमें देश को मज़बूत करने का मौक़ा मिल जाता है.
आप सब की खुशहाली को देखकर हम बिलकुल निश्चिन्त हैं.हमारे देश में भ्रष्टाचार से लोग दुखी हैं,यह कोरी अफवाह है,इससे यह सिद्ध हो गया है.हमको तो लगता है कि कुछ विदेशी ताकतें नहीं चाहतीं कि भारत प्रगति के रास्ते पर बढ़े,पर हमें आप पर पूरा भरोसा है कि आप हमारे साथ हैं और ऐसे ही अपना स्नेह बनाये रखेंगे !
जयहिन्द !

3 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

जय हि‍न्‍द तीन बार बोलना होता है

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

....अगली बार ध्यान रखेंगें !

आभार ।

Arvind Mishra ने कहा…

यह किसका संबोधन किसको है