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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

बयान बाबू का बयान !

०४/०४/२०१३ को जनवाणी और जनसंदेश में !


राजधानी की व्यस्तता से समय निकालकर थोड़े दिन के लिए हम गाँव आ गए थे।होली का त्यौहार ख़त्म हुआ और हमारी छुट्टियाँ भी,सो हम अपने सामान के साथ शहर की ओर जाने वाली सड़क पर बस का इंतजार करने लगे।अचानक सामने से बयान बाबू साइकल पर सवार दिखाई दिए।हमें देखते ही वो साइकल पटककर हमारी तरफ लपके।हमने उनके बोलने से पहले ही आत्मसमर्पण करते हुए गुहार लगाई कि इस समय हम बयान लेने के मूड में नहीं हैं,बेबस होकर राजधानी पहुँचने का साधन देख रहे हैं।हम आपसे वहीँ पर बयान ले लेंगे।

बयान बाबू कुछ और सुनने के मूड में नहीं थे ।बोलने लगे,’समय बहुत कम है।हम कहीं भी,किन्हीं भी परिस्थितियों में बयान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।इसलिए इस समय हम गाँव-गली और शहर का भेद किये बिना बयान बाँट रहे हैं।जब दूसरी दिशा से हर पल बदलते हुए बयान आ रहे हों तो हम उसका जवाब देना अपना कर्तव्य समझते हैं।हमारी खासियत है कि हम अपने बयान पर कायम और डटे रहते हैं,मुलायम नहीं होते।आप हमसे ताज़ा बयान ले लीजिये,अपनी बस बाद में पकड़ लेना।मेरा बयान छूट गया तो बहुत अनर्थ हो जायेगा।हाईकमान ने हमारा चयन बयान देने के लिए ही किया है और हम अपनी उपयोगिता सिद्ध करने पर उतारू हैं इसीलिए हम साइकल से उतरे हैं।

हम बेबस होकर उनके बयान को गले लगाने को तैयार हो गए ।वे अपने पूरे फॉर्म में दिख रहे थे।हमने उनसे पहला सवाल पूछा कि प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव में आपकी पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहेगा ?बयान बाबू ने पास पड़ी साइकल को नज़रंदाज़ करते हुए कहा,’केंद्र में हमारी सरकार फिर से बनने जा रही है ।कुल सीटों में आधी हमारे खाते में डायरेक्ट-कैश की तरह ट्रांसफर हो जाएँगी।हम खांटी समाजवादी हैं और खोटे समाजवादियों से हमारा कोई मुकाबला ही नहीं है।हाथ और हाथी स्वाभाविक मित्र हो  सकते हैं,पर साइकल नहीं ।हाथ ही साइकल को घुमाता है,साइकल कभी हाथ को न घुमा सकती है और न ही दिशा दे सकती है। ऐसे लोगों को  सिर्फ कांधा देने के लिए हाथ का साथ मिलेगा और यह काम हमारी अगुवाई में होगा।

हमने उनकी इस आत्मविश्वास भरी भविष्यवाणी का कारण पूछा तो उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए बताया,’हमारे बयान दुराग्रह या सत्याग्रह से परे होते हैं।जब भी हमारी जीभ मचलती है,बयान फट पड़ते हैं।हमारा काम बयान देना है,संभालना नहीं। हम केवल मंत्रालय सँभालते हैं।हमने अपने हाथ से आम आदमी को उठाने का संकल्प लिया हुआ है।इस काम को हम किसी और के भरोसे नहीं छोड़ सकते।जो ऐसा करने की कोशिश करेंगे,वे ही उठ जायेंगे।

अचानक बयान बाबू थर-थर कांपने लगे।हमने पूछा कि सब कुशल तो है ? वे सहज होते हुए बोले,’यह थरथराहट मोबाइल की है।हाईकमान का सन्देश है आया है कि जिम्मेदारी बदल रही है।अब आपको राजधानी में कल मिलूँगा,एक नए बयान के साथ।इतना कहकर उन्होंने पास पड़ी साइकल को असहाय नज़रों से देखा और हमारे साथ ही अगली बस में सवार हो गए।

 

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