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शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

हम सबको आंनद चाहिए !

आखिरकार सरकार से जनता के दुःख देखे नहीं गए।उसने लोगों को ‘आनंद’ देने का फैसला ले ही लिया।इस उल्लेखनीय शुरुआत का श्रेय मध्य प्रदेश सरकार को जाता है,जिसने बक़ायदा एक ‘आनंद मंत्रालय’ खोल रखा है।यह विभाग तकलीफ़ पाए लोगों को ‘आनंद’ की खुराक देगा।उनको फील कराया जाएगा कि जिसे वे दुःख या तकलीफ समझ रहे हैं,दरअसल वह आनंद है।हम तो वैसे ही ठंडा पानी पीकर सारे गम भुलाने वाले लोग हैं।फिर यहाँ तो आपको खुश करने के लिए पूरा विभाग पीछे लग गया है।कल पूरी कायनात लग जाएगी।जब तक आप विभाग को यह लिखकर नहीं दे देते कि आप खुश हैं,कहीं नहीं जा सकते।सुख की छोड़िए,दुखी रहना भी अब आपके वश में नहीं रहा।

इस तरह की शुरुआत असल में थोड़ा देर से हुई।दूसरे देश इसमें काफी आगे बढ़ गए हैं।हो सकता है सरकारी दौरे में गए किसी ‘आनंद पथिक’ को वहीँ से यह आइडिया मिला हो।आए दिन दाल-रोटी जैसी छोटी-मोटी बातों से आजिज सरकार को एक बड़ा नुस्खा हाथ लगा।उसने झट से इस ‘दुखहरण विभाग’ का गठन कर दिया।इससे अन्य प्रदेश और फिर पूरा देश प्रेरणा लेगा।

कुछ लोग ‘हैप्पीनेस डिपार्टमेंट’ खोले जाने से ज्यादा हैप्पी नहीं हैं।जब हमारे यहाँ ‘आपदा मंत्रालय’ काफी पहले से खुला हुआ है और आपदाएं भी सुचारू रूप से आ रही हैं तो ‘आनंद मंत्रालय’ क्यों नहीं हो सकता भाई ! सरकारी हो या असरकारी,आनंद तो सबको हर हाल में चाहिए ही ।फ़िलहाल नया विभाग खुलने भर से ही कई चेहरे खिल गए हैं!

सच पूछिए,ऐसे मंत्रालय की दरकार सारे देश को है।सरकार के तमाम भारी-भरकम विभाग मिलकर भी आनंद की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।मध्य-प्रदेश ने हमें राह दिखाई है।सूखा-राहत,बाढ़-राहत के नाम पर कब तक अधिकारी और जनप्रतिनिधि आनन्दित होते रहेंगे ?इसमें ज्यादा स्कोप भी नहीं बचा है।नया विभाग खुलेगा तो सबको राहत मिलेगी।लोगों में आनंद के ‘कैसेट,सीडी और टेबलेट बाँटने की योजना है।इसमें पहले आओ-पहले खाओ का चक्कर भी नहीं है।‘सरकारी आनंद’ प्राप्त व्यक्ति किसी दूसरे को यह नुस्खा पास कर सकता है।शुरुआत में महीने में एक ही टेबलेट खाने का आनंद मिलेगा।आगे ऐसे टेबलेट की खोज की जा रही है,जिसे केवल एक बार खाकर पाँच साल तक आनंदित रहा जा सकता हो ! फिर नेता,अफसर और जनता सब मगन रहेंगें ।मिल-बाँटकर खाने का आनंद ही कुछ और है। 

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