पृष्ठ

बुधवार, 21 अगस्त 2013

मंत्रजाप करें, टारगेट पूरा होगा !




                                                           21/08/2013 को जनसंदेश में !
 

वे बड़ी जल्दी में हैं.उन्होंने समय का इंतजार करने से बेहतर यह समझा कि लोग उनका ही इंतजार करने लगें.इसके लिए भले ही उनको लाल किला न मिला हो पर उन्होंने अपना भाषण लालन कॉलेज से देकर देश चलाने की अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया है.उन्होंने बोलने से पहले ही कह दिया था कि लोग दिल्ली और गुजरात की तुलना करेंगे.उन्होंने लोगों को समझा दिया है कि गुजरात का शेष भारत से सिर्फ तुलनात्मक महत्त्व है, गोया वह इस देश का हिस्सा न हो !

उनके भाषण पर खूब तालियाँ मिलीं .उनके ही बुजुर्ग नसीहत की छींक उनके लालकिला-अभियान को रोक पाने में असफल दिख रही है.इसीलिए जल्दी में ही एक सम्मिलित बैठक भी आयोजित कर ली गई ताकि टोकाटाकी करने वाले सावधान हो जांय .देश को बदहाली और मंहगाई से मुक्ति दिलाने के नाम पर जो लोग इकठ्ठा हुए थे वे जब बैठक से बाहर निकले तो सबके पास एक टारगेट था.उन्होंने अपने टारगेट को तो आज़ादी के दिन ही सबके सामने प्रकट कर दिया था पर बाकियों के लिए 272 का मन्त्र-जाप था.इसे हर सदस्य और कार्यकर्त्ता को चुनावों तक जपना है ताकि वे गिरते हुए देश को अपनी गोदी में उठा सकें .

कहते हैं कि किसी बात को यदि बार-बार कहा जाय तो वह सच हो जाती है,भले ही वह झूठ क्यों न हो.यही मान्यता मन्त्रों को लेकर चली आ रही है.भारतीय संस्कृति और धर्म के मानने वाले सबसे बड़े समर्थक उनके ही लोग हैं .ऐसे में नए मन्त्र ईजाद करना,पुरानों को झाड-पोंछकर जपने लायक बनाना इन सबकी कुशलता है.वे अपने दल के नए नायक हैं सो मन्त्र भी नए बनेंगे.मंदिर का मन्त्र अब निष्प्रभावी हो चुका है इसलिए राष्ट्रवाद का शंख सुनाई दे रहा है.आम चर्चा यही है कि वो आएंगे और जादू की छड़ी घुमाते ही पाकिस्तान और डॉन ,मंहगाई और भ्रष्टाचार सब उनके चरणों में लोटने लगेंगे.इस बात को उनके ही वरिष्ठ साथी नहीं मानते पर जनता यदि यह मंत्रजाप शुरू कर दे तो वे यह सब पलक झपकते ही कर डालेंगे.

अब इस देश और उसके रहने वालों को सोचना है कि उन्हें क्या चाहिए ?उन्होंने देश के सामने अपना एजेंडा तय कर दिया है.देश में विकास करने का वादा उन्होंने इसीलिए नहीं लिया है क्योंकि ऐसा तो कई लोग कर चुके हैं और उनका हो भी गया है.जनता यदि देश बचाना चाहती है तो उसे 272 की गिनती याद रखनी चाहिए.मंहगाई या भ्रष्टाचार दूर करना उनके टारगेट में नहीं है.वे तो बस चाहते हैं कि जनता उनके खीसे में 272 का नजराना डाल दे और वे देश-सेवा शुरू कर दें.उनकी इस सेवाभक्ति की आतुरता से जनता पूरी तरह ओत-प्रोत हो चुकी है और इस इंतजार में है कि कब चुनाव आयें और वह अपना काम कर सके.

अब वे करोड़ों की जनता का टारगेट बन चुके हैं और उनका टारगेट महज़ 272 है.यह बात अगर किसी को समझ नहीं आ रही है तो उनका मन्त्र-जाप करके देखे ,तुरंत काम करता है.


 

1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

काल ही अन्तिम निर्णायक है