रविवार, 29 मार्च 2026

शांतिप्रेमी का दुनिया के नाम ख़त

 प्यारे विश्व नागरिको 


मैं दुनिया का सबसे बड़ा शांतिदूत बोल रहा हूँ।तुम सबकी ख़ैर चाहता हूँ इसलिए कुछ कहने आया हूँ ।मेरे पास दुनिया भर में शांति स्थापित करने के अलावा कोई काम नहीं है।जहाँ शांति है,वहाँ सुनियोजित अशांति फैलाना मेरा काम है ताकि वहाँ ठीक तरह से शांति क़ायम की जा सके।जहाँ नहीं है, वहाँ इसे जबरन स्थापित कर देता हूँ ।शांति के प्रति मेरी इससे बड़ी प्रतिबद्धता क्या होगी ! फिर भी नामुराद दुनिया वालों ने मुझेशांतिप्रदान करने से मना कर दिया।पूरी दुनिया में शांति लाने वाले कोशांतिके लिए तरसाना कहाँ का न्याय है ? मेरे रहते शांति स्थापित करने में कोई ढील नहीं दी जाएगी।थोड़े समय पहले मैंने इसीलिए एक देश के राष्ट्राध्यक्ष को उठवा लिया था।अब उधर पूरी तरह शांति है।और तो और, ‘शांतिके लिए पवित्र आतंकी के मुँह में नीर डाल चुका हूँ।वह अब दूसरों का ख़ून पी रहा है।ऐसे मेरे अद्भुत शांति-समर्थक हैं।


यदि मैं होता तो दुनिया वाक़ई कितनी एकरंगी होती ! मैं इसमें चुन-चुनकर रंग भर रहा हूँ।अस्पताल हों या स्कूल, मेरे बम रंग बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते।मैं वादा करता हूँ कि मेरे रहते दुनिया का एक भी प्राणी शांति से वंचित नहीं रह पाएगा।जो लोग बेरोजगारी का रोना रो रहे थे,वह आज काम पर लग गए हैं।सारी दुनिया मेरे देश की ओर निहार रही है।मेरी नज़र इस वक़्त केवल हारमूज़ पर लगी हुई है।दुनिया भर का तेल निकालने के बाद वहीं से तेल निकालना बाक़ी है।दुश्मन सबक़ सीख रहा है।जब तक मैं चाहूँगा ,वह चीखता और सीखता रहेगा।मुझे अपने देश को महान बनाने की ज़िद है।इसके लिए कोई भी शैतान बने,मुझे फिक्र नहीं।मेरा जन्म इसीलिए हुआ है,इसका आभास मुझे रात के सपने में नहीं अपितु दिवास्वप्न के दौरान हुआ।मेरा स्वप्न मेरे देश का ही नहीं पूरी दुनिया का बन चुका है।इसे सब लोग जितनी जल्दी समझ लें,उनके लिए अच्छा होगा।


युद्धकाल में मैं अखंड शांति की बात कर रहा हूँ।मेरे पास शांति काट्रंप-कार्डहै।इस समय पूरी दुनिया में मेरे सिवा कोई नहीं है जिसे शांति की इतनी ज़बरदस्त तलाश हो।कुछ समय पहले मैंने बार-बार चेताया था कि तुम मुझे शांति दो, नहीं तो मैं तुम्हें युद्ध दूँगा।दुनिया ने भले ही मेरी बात नहीं मानी पर मैं अपने कहे पर क़ायम हूँ।इस दुनिया में कोई भी युद्ध मेरे बिना तो शुरू होता है और ही बंद।मैं अपने देश को सबसे आगे ले जाना चाहता हूँ,चाहे इसके लिए मेरे अपनों की बलि चढ़ जाए।आख़िर कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।आज मेरे देश के अलावा बाक़ी दुनिया कातर भरी नज़रों से मुझे देख रही है।मेरी साख इतनी गिर चुकी है कि मुझे कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है ।वह पिद्दी ईरानी-मिसाइल भी नहीं।इसकी सज़ा पूरी दुनिया भुगतेगी।


मैं पर्याप्त मात्रा में उदार भी हूँ।अगर किसी को एकमुश्त शांति नहीं हज़म हो सकती है उसके लिए मैं इसे किश्तों में भी ऑफर करता हूँ।इसको पाँच ,दस फिर तीस दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है।अपना सहयोगी हुआ तोलीज़पर भी दे सकता हूँ।इससे दुश्मन को आराम मिल सकेगा और मुझे सिक्का उछालने के लिए समय कि आख़िर करना क्या है ? दुश्मन मिसाइल की रेंज बढ़ा रहा है और मैं युद्ध-विराम के दिन।इसी से पता चलता है कि यदि सही समय पर सत्ता मेरे हाथ नहीं आती तो इस बेरंग दुनिया में मुर्दा-शांति होती ! अब देखिए,कितनी हलचल मची है।सभी देश रोटी के बजाय मिसाइल और बम की डिमांड कर रहे हैं ।उधर दूसरे मेरीफाइलखोल रहे हैं, इधर मैंने व्यापार के नए फ्रंट खोल दिए हैं।मेरे एक दाँव से बाज़ार,सोना,मुद्रा,तेल,गैस सब जीवंत हो उठे हैं।इस दौरान किसका-कितना उत्थान या पतन हो जाए, कोई नहीं कह सकता।एक अकेला कितना बदलाव ला सकता है,यह दुनिया देख रही है।अकेला चना भाड़ भले झोंक पाए,कोहराम मचाने के लिए एक सिरफिरा ही काफी है।


मेरे पास रोज़ नए प्रस्ताव आते हैं ।कुछ लोगों को युद्ध चाहिए, कुछ को शांति।मेरे पास दोनों हैं।ये मेरे लिए दाएँ और बाएँ हाथ के खेल हैं।जब मन होता है,खेल लेता हूँ।दुनिया को भी समझना चाहिए कि युद्ध की क़ीमत होती है तो शांति की भी होती है।इससे ज़्यादा सहयोग मैं माँग भी नहीं रहा हूँ।मैं अपना देश नहीं बचा रहा हूँ,बल्कि बाक़ी दुनिया की मुझे ज़्यादा चिंता है।



शांति का चिर आकांक्षी 


अंकल सैम 


रविवार, 1 मार्च 2026

असल बुद्धि बनाम नक़ल बुद्धि

इन दिनोंबुद्धिचर्चा में है ।दिलचस्प है कि यह बुद्धिबनावटीहै।कहते हैं बाज़ार में इसकी भारी माँग है।असल-बुद्धि की बड़ी कमी थी तभी वह इतनीडिमांडमें आई बनावटी-बुद्धिके इस अचानक उबाल से सभी हतप्रभ हैं; ख़ासकर असल बुद्धि।जिस बुद्धि को मनुष्य ने बड़ी मेहनत और जतन से अर्जित किया था, उसे यह नई-नवेली और नकली बुद्धि महज़ एक उँगली से ख़ारिज कर रही है।पहले प्रतिभा का प्रदर्शन सामान्य तरीक़े से और कभी-कभार होता था,अब तुरंत विस्फोट हो रहा है।जो गणना घंटों और दिनों में होती थी,वह पलक झपकते हो रही है।इससे मेधा और प्रतिभा अपने को असहाय महसूस कर रही हैं।समझदार लोग इसेनवाचारकह रहे हैं।

इस संघर्ष मेंबाल-बुद्धिऔरबैल-बुद्धिको बड़ा मज़ा रहा है।असल बुद्धिने लंबे समय तक एकछत्र राज किया है।हमेशा इसने दूसरों का मज़ाक़ बनाया।अपने आगे किसी को घास तक नहीं डाली।सच तो यह है किअक़्ल बड़ी या भैंसका सही अर्थ कभी समझ में ही नहीं आया।बुद्धिमानों ने जाने कैसे-कैसे मुहावरे गढ़ रखे थे ! कभी तो अक़्ल को घुटने तक ले आए और कभी बैल,गधा और भैंस को अक़्ल का पर्याय बना दिया।इसके उलट शेर,भेड़िया और लकड़बग्घे ज़्यादा बुद्धिमान माने गए।यहाँ भी मनुष्य ने सामाजिक भेदभाव बरता।उसने बुद्धि का बँटवारा कुलीनों में ही किया।हमारे पूर्वजों से किसी ने यह तक नहीं पूछा कि भाई, भैंस को अक्ल के मामले में क्यों घसीट रहे हो ? बेचारी भैंस को पता भी नहीं कि अब तक उसका कितनी बार सार्वजनिक अभिनंदन किया गया है ! अक़्ल वाला कोई इंसान होता तो मानहानि का दावा कर देता या न्यायालय ही इतने महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर स्वतः संज्ञान ले लेता।पर भैंस तो किसी अभिजात्य-वर्ग में आती नहीं।उसे अब घास खाने के भी लाले पड़ रहे हैं क्योंकि आजकल के युवा वही छील रहे हैं।बनावटी-बुद्धिने उनके लिए संभावनाओं कीरीलजो खोल दी है।नक़ली प्रोफाइल,नक़ली वीडियो और नक़ली कंटेंट का बड़ा बाज़ार बाहें फैलाए उसे दबोचने के लिए खड़ा है।


वैसे मनुष्य है बड़ा अजीब प्राणी।वह लीक पर चलने में विश्वास नहीं करता।उस पर हमेशा कुछ अलग करने की सनक सवार रहती है।बनावटी-बुद्धिमनुष्य का नया खिलौना है।पढ़े-लिखे लोग आईसे नीचे बात ही नहीं कर रहे हैं।कुछ ने इसे अपने दिल को बहलाने का यंत्र बना लिया है।कृत्रिम-बुद्धिविज्ञान,कला,चिकित्सा में तो कमाल कर ही रही है, इसके ज़रिएफ़ास्ट-फ़ूडसे भी फ़ास्ट साहित्य रचा जा रहा है। आईके मुँह में केवल पाँच शब्द झोंकने पर पाँच सौ शब्दों का साहित्य पल भर में प्रकट हो जाता है।ये अपने प्रेमचंद और परसाई भी पैदा कर लेगी।एक और बड़ा अंतर पैदा हुआ है इन दोमेधाओंमें।पहले वाली मेधा जहाँ बादाम और गाजर खाने से जागृत होती थी, अब वाली केवल डेटा की ख़ुराक लेती है।साहित्य अब ऐसे समृद्ध होगा।समारोहों में वक्तव्य आईका होगा किंतु लिफाफे की हिफ़ाज़त महोदय के पास होगी।


इस सबके इतर कुछ ग़ैर-ज़रूरी सवाल भी हैं।तमाम लोगों को आशंका है किबनावटी-बुद्धिरोजगार खा जाएगी, आदमी किसी काम का नहीं रहेगा।ये सब केवल अफवाहें हैं।अव्वल तो आदमी अब किसी काम का बचा ही कहाँ ? दूसरे उसकी असल बुद्धि भी नक़ली वाली के शरणागत हो गई है।सच तो यह है कि आदमी ने अपने निकम्मेपन का तोड़ पा लिया है।काम करने का बहाना केवल आदमी बनाता रहा है,मशीन नहीं।उसे जोटास्कदिया जाता है,वह उसी वक़्त पूरा कर लेती है , कि बीड़ी फूँकती है ! इसलिए कोई भी मशीनी यंत्र कितना भी चतुर हो जाए,आदमी से अधिक शातिर कभी नहीं हो सकता।नकली बुद्धिका एक महत्त्वपूर्ण हासिल यह भी है कि आदमी ने अपने लिए एक ईमानदार नौकर रख लिया है।समय बताएगा कि भविष्य में यहनौकरआदमी को किस तरह और कितनी मदद करता है या रफूचक्कर होता है


इस नई बुद्धि से नेता अलग रोमांचित हैं।उन्हें लगता है, चुनाव में वादे वे करेंगे और उन्हें पूरा आईकर देगी।अगर यह प्रयोग सफल रहा तो आईजल्द ही प्रदूषण और ट्रैफिक का समाधान भी निकाल लेगी।फिर वेकूड़े के पहाड़को भी उसी से उठवा लेंगे ! काम संतोषजनक रहा तो आगे चलकरईवीएमकी भी सेवा ली जा सकेगी।असल-बुद्धि का इस्तेमाल केवल पोस्टरबाजी और लफ़्फ़ाज़ी के लिए किया जाएगा।इससे इसके और घिसने का ख़तरा भी कम होगा।


बहरहाल, दुनिया ने अब तकअसल बुद्धिका कहर देखा है, ट्रंप का टैरिफ झेला है।अब उसेनकली-बुद्धिका ज़हर भी दिखेगा और डीपफेक का अमृत भी।


शांतिप्रेमी का दुनिया के नाम ख़त

  प्यारे विश्व नागरिको   मैं दुनिया का सबसे बड़ा शांतिदूत बोल रहा हूँ।तुम सबकी ख़ैर चाहता हूँ इसलिए कुछ कहने आया हूँ ।...