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शांतिप्रेमी का दुनिया के नाम ख़त
प्यारे विश्व नागरिको मैं दुनिया का सबसे बड़ा शांतिदूत बोल रहा हूँ।तुम सबकी ख़ैर चाहता हूँ इसलिए कुछ कहने आया हूँ ।...
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राजधानी फिर से धुंध की गिरफ़्त में है।बीसियों दिन हो गए , साफ़ हवा रूठी हुई है।शायद उसे भी किसी के ख़त का इंतज़ार है।फ...
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मित्रता एक ऐसा रिश्ता है , जो सबसे ज़्यादा अबूझ रहा है।यह देशकाल , परिस्थिति और सुविधा के अनुसार परिवर्तित होता रहता है।मि...
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कल सुबह जब हम सैर पर निकले , रास्ते में बरगद के पेड़ के नीचे कई कुत्ते जमा थे।पहले तो मैं डरा फिर आशंका हुई कि हो न...

1 टिप्पणी:
धार्मिक व्यक्ति के दृष्टिकोण में, नेता के दृष्टिकोण में ,भीड़ के दृष्टिकोण में और लेखक के दृष्टिकोण में फर्क दिखना ही चाहिए। आपने लेखकीय धर्म का खूब निर्वहन कया है। जोरदार आलेख के लिए बहुत बधाई।
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