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शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

विशुद्ध-टाइप का धार्मिक !

मैं ‘नए भारत’ का ‘नया धार्मिक’ हूँ।अपने धर्म को लेकर मेरी धारणा इतनी मज़बूत है कि धर्म भले ढह जाए,धारणा को रत्ती-भर खरोंच नहीं आ सकती।वैचारिक होना अब एक दक़ियानूसी मामला है।इसमें समय-समय पर व्यक्ति के फिसलने का ख़तरा बना रहता है।जबसे मैंने नई तरह का धर्म धारण किया है,अहर्निश प्रसन्न रहता हूँ।न भूख लगती है न ही प्यास।किंतु अपने धर्म को पुष्ट करने और दूसरों के मुक़ाबले ऊँचा उठाने के लिए मजबूरन खाना पड़ता है।धर्म के प्रति यह मेरा त्याग है।

मैं चाहूँ तो अपने घर में शांतिपूर्वक खा सकता हूँ।पर मैं इतना स्वार्थी नहीं।बिना क्रांति किए मेरा पेट नहीं भरता।खाना बाहर से मँगाता हूँ ताकि विधर्मियों को तो पता चले कि धर्म के प्रति मेरी दृढ़ता कितनी है ! लाने वाला यदि दूसरे मज़हब का हुआ तो अपना ऑर्डर तुरंत कैंसिल कर देता हूँ।इस तरह अपने धर्म की स्थापना करता हूँ।

पैदा होने से पहले ही मैं धर्म-परायण हूँ।यहाँ तक कि ‘डेलीवरी’ के समय भी मैंने अस्पताल वालों को चेता दिया था कि मेरा नाड़ा कोई ‘विधर्मी’ नर्स न काटे।तभी से नाड़ा पकड़े घूम रहा हूँ ताकि मेरे धर्म की ध्वजा फहराती रहे।

मैं अपने धर्म के प्रति सदैव संवेदनशील रहता हूँ।कई बार ‘समानता’ और ‘इंसानियत’ ने मेरी राह में बाधा बनने की कोशिश की,पर मैंने सिरे से अस्वीकार कर दिया।मज़हब को लेकर मेरी धारणा इतनी मज़बूत है कि कोई क़ानून तक उसे हिला तक नहीं सकता।कुछ भी हो जाए,मैं अपने पथ से डिगने वाला नहीं।

धर्म के प्रति मेरी दृढ़ता उल्लेखनीय रूप से बलिष्ठ है।एक बार हवाई सफ़र के दौरान जब मुझे पता चला कि जहाज का पायलट दूसरे धर्म का है तो मैं झट से कूद पड़ा।इस घटना से मेरी दोनों टाँगे भले टूट गई हों,पर अपने धर्म को बचाने की ख़ुशी कहीं ज़्यादा है।

अपने धर्म की रक्षा के लिए मैं बराबर प्रयत्नशील रहता हूँ।यहाँ तक कि अब ‘चिकन’ भी खाता हूँ तो निश्चित कर लेता हूँ कि अपने ही धर्म के रसोइए के हाथों बना हो।इस तरह मेरा धर्म मेरे हाथों बिलकुल सुरक्षित है !

संतोष त्रिवेदी

#Zomato

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