प्यारे विश्व नागरिको
मैं दुनिया का सबसे बड़ा शांतिदूत बोल रहा हूँ।तुम सबकी ख़ैर चाहता हूँ इसलिए कुछ कहने आया हूँ ।मेरे पास दुनिया भर में शांति स्थापित करने के अलावा कोई काम नहीं है।जहाँ शांति है,वहाँ सुनियोजित अशांति फैलाना मेरा काम है ताकि वहाँ ठीक तरह से शांति क़ायम की जा सके।जहाँ नहीं है, वहाँ इसे जबरन स्थापित कर देता हूँ ।शांति के प्रति मेरी इससे बड़ी प्रतिबद्धता क्या होगी ! फिर भी नामुराद दुनिया वालों ने मुझे ‘शांति’ प्रदान करने से मना कर दिया।पूरी दुनिया में शांति लाने वाले को ‘शांति’ के लिए तरसाना कहाँ का न्याय है ? मेरे रहते शांति स्थापित करने में कोई ढील नहीं दी जाएगी।थोड़े समय पहले मैंने इसीलिए एक देश के राष्ट्राध्यक्ष को उठवा लिया था।अब उधर पूरी तरह शांति है।और तो और, ‘शांति’ के लिए पवित्र आतंकी के मुँह में नीर डाल चुका हूँ।वह अब दूसरों का ख़ून पी रहा है।ऐसे मेरे अद्भुत शांति-समर्थक हैं।
यदि मैं न होता तो दुनिया वाक़ई कितनी एकरंगी होती ! मैं इसमें चुन-चुनकर रंग भर रहा हूँ।अस्पताल हों या स्कूल, मेरे बम रंग बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते।मैं वादा करता हूँ कि मेरे रहते दुनिया का एक भी प्राणी शांति से वंचित नहीं रह पाएगा।जो लोग बेरोजगारी का रोना रो रहे थे,वह आज काम पर लग गए हैं।सारी दुनिया मेरे देश की ओर निहार रही है।मेरी नज़र इस वक़्त केवल हारमूज़ पर लगी हुई है।दुनिया भर का तेल निकालने के बाद वहीं से तेल निकालना बाक़ी है।दुश्मन सबक़ सीख रहा है।जब तक मैं चाहूँगा ,वह चीखता और सीखता रहेगा।मुझे अपने देश को महान बनाने की ज़िद है।इसके लिए कोई भी शैतान बने,मुझे फिक्र नहीं।मेरा जन्म इसीलिए हुआ है,इसका आभास मुझे रात के सपने में नहीं अपितु दिवास्वप्न के दौरान हुआ।मेरा स्वप्न मेरे देश का ही नहीं पूरी दुनिया का बन चुका है।इसे सब लोग जितनी जल्दी समझ लें,उनके लिए अच्छा होगा।
युद्धकाल में मैं अखंड शांति की बात कर रहा हूँ।मेरे पास शांति का ‘ट्रंप-कार्ड’ है।इस समय पूरी दुनिया में मेरे सिवा कोई नहीं है जिसे शांति की इतनी ज़बरदस्त तलाश हो।कुछ समय पहले मैंने बार-बार चेताया था कि तुम मुझे शांति दो, नहीं तो मैं तुम्हें युद्ध दूँगा।दुनिया ने भले ही मेरी बात नहीं मानी पर मैं अपने कहे पर क़ायम हूँ।इस दुनिया में कोई भी युद्ध मेरे बिना न तो शुरू होता है और न ही बंद।मैं अपने देश को सबसे आगे ले जाना चाहता हूँ,चाहे इसके लिए मेरे अपनों की बलि चढ़ जाए।आख़िर कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।आज मेरे देश के अलावा बाक़ी दुनिया कातर भरी नज़रों से मुझे देख रही है।मेरी साख इतनी गिर चुकी है कि मुझे कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है ।वह पिद्दी ईरानी-मिसाइल भी नहीं।इसकी सज़ा पूरी दुनिया भुगतेगी।
मैं पर्याप्त मात्रा में उदार भी हूँ।अगर किसी को एकमुश्त शांति नहीं हज़म हो सकती है उसके लिए मैं इसे किश्तों में भी ऑफर करता हूँ।इसको पाँच ,दस फिर तीस दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है।अपना सहयोगी हुआ तो ‘लीज़’ पर भी दे सकता हूँ।इससे दुश्मन को आराम मिल सकेगा और मुझे सिक्का उछालने के लिए समय कि आख़िर करना क्या है ? दुश्मन मिसाइल की रेंज बढ़ा रहा है और मैं युद्ध-विराम के दिन।इसी से पता चलता है कि यदि सही समय पर सत्ता मेरे हाथ नहीं आती तो इस बेरंग दुनिया में मुर्दा-शांति होती ! अब देखिए,कितनी हलचल मची है।सभी देश रोटी के बजाय मिसाइल और बम की डिमांड कर रहे हैं ।उधर दूसरे मेरी ‘फाइल’ खोल रहे हैं, इधर मैंने व्यापार के नए फ्रंट खोल दिए हैं।मेरे एक दाँव से बाज़ार,सोना,मुद्रा,तेल,गैस सब जीवंत हो उठे हैं।इस दौरान किसका-कितना उत्थान या पतन हो जाए, कोई नहीं कह सकता।एक अकेला कितना बदलाव ला सकता है,यह दुनिया देख रही है।अकेला चना भाड़ भले न झोंक पाए,कोहराम मचाने के लिए एक सिरफिरा ही काफी है।
मेरे पास रोज़ नए प्रस्ताव आते हैं ।कुछ लोगों को युद्ध चाहिए, कुछ को शांति।मेरे पास दोनों हैं।ये मेरे लिए दाएँ और बाएँ हाथ के खेल हैं।जब मन होता है,खेल लेता हूँ।दुनिया को भी समझना चाहिए कि युद्ध की क़ीमत होती है तो शांति की भी होती है।इससे ज़्यादा सहयोग मैं माँग भी नहीं रहा हूँ।मैं अपना देश नहीं बचा रहा हूँ,बल्कि बाक़ी दुनिया की मुझे ज़्यादा चिंता है।
शांति का चिर आकांक्षी
अंकल सैम
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